
“धुसुरी बुजुर्ग का ‘कागजी विकास’ अब शासन के रडार पर, जांच टीम के गठन से भ्रष्टाचारियों की उड़ी नींद” “गरीबों के आवास पर डाका? सिद्धार्थनगर के नौगढ़ में बड़े घोटाले की बू, लखनऊ से चला जांच का डंडा”
फाइलों में सड़क और कुएं, धरातल पर सन्नाटा: धुसुरी बुजुर्ग में सरकारी धन की बंदरबांट का होगा पर्दाफाश" "नौगढ़ ब्लॉक में हड़कंप: धुसुरी बुजुर्ग के 'सफेदपोशों' की खैर नहीं, शासन ने कसी जांच की नकेल"
।। धुसुरी बुजुर्ग: कागजी विकास की ‘खोल’ उतारने को तैयार शासन, जांच टीम गठित होते ही मची खलबली ।।
अजीत मिश्रा (खोजी) उत्तर प्रदेश।।
सिद्धार्थनगर।। विकास की गंगा को फाइलों में बहा देने वाले ‘सिस्टम’ के खिलाफ़ अब शासन ने डंडा उठा लिया है। जनपद सिद्धार्थनगर के विकासखंड नौगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत बस्ठा टोला धुसुरी बुजुर्ग में हुए कथित महाघोटाले की गूंज लखनऊ तक पहुँच गई है। उत्तर प्रदेश शासन ने ग्रामीणों की शिकायतों पर मुहर लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच टीम गठित करने का कड़ा आदेश जारी किया है। इस आदेश ने उन सफेदपोशों और सरकारी कारिंदों की नींद उड़ा दी है, जिन्होंने गरीबों के हक पर डाका डालकर अपनी तिजोरियां भरी हैं।
भ्रष्टाचार की लंबी फेहरिस्त: क्या-क्या है निशाने पर?
शिकायतकर्ता संजय सिंह और अन्य ग्रामीणों ने शासन को भेजे गए दस्तावेजों में भ्रष्टाचार का जो ‘कच्चा चिट्ठा’ खोला है, वह चौंकाने वाला है। आरोपों के केंद्र में निम्नलिखित कार्य हैं:
आवास योजना का खेल: पात्र गरीब झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं, जबकि कथित रूप से अपात्रों को रेवड़ियों की तरह आवास बांटे गए।
कागजी निर्माण: वृक्षारोपण से लेकर नाली, चकरोड और कुआं निर्माण तक के कार्यों को धरातल के बजाय कागजों पर ही ‘चमका’ दिया गया।
मनरेगा में सेंध: मनरेगा और सड़क निर्माण के बजट में भारी बंदरबांट के आरोप हैं।
शासन का सख्त रुख: अब नापेंगे जिम्मेदार
ग्रामीण विकास विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार के इस खेल में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। शासन ने साफ निर्देश दिया है कि टीम न केवल कार्यों का स्थलीय सत्यापन करेगी, बल्कि वित्तीय अनियमितताओं की भी गहराई से पड़ताल करेगी।
“जब से शासन के पत्र की खबर गांव में आई है, पंचायत से लेकर ब्लॉक मुख्यालय तक हड़कंप है। जो काम पहले पूरे बताए जा रहे थे, अब उन्हें आनन-फानन में लीपापोती करने की कोशिशें भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं।”
ग्रामीणों की एक ही मांग: केवल जांच नहीं, कार्रवाई हो
धुसुरी बुजुर्ग के ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में भी कई बार आवाज उठाई गई, लेकिन स्थानीय स्तर पर सांठगांठ के चलते मामले को दबा दिया गया। अब जब शासन ने सीधे हस्तक्षेप किया है, तो लोगों में न्याय की उम्मीद जगी है। ग्रामीणों ने दो टूक मांग की है कि जांच टीम केवल औपचारिकता न करे, बल्कि दोषियों को सलाखों के पीछे भेजे और लूटा गया सरकारी धन वसूल करे।
अब सबकी निगाहें जांच टीम की दस्तक पर हैं। देखना यह है कि प्रशासन के रडार पर कौन-कौन से ‘मगरमच्छ’ फंसते हैं, या फिर जांच की आंच ठंडी पड़ जाएगी?
















